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मौसम [ग़ज़ल]- सतपाल 'ख्याल',
राह दिखा देता है [ग़ज़ल]- सतपाल 'ख्याल',
साल नया अब घर की दीवारों पर टांग दिया है [ग़ज़ल]  - सतपाल "ख़्याल
शाम ढले मन पंछी बन कर दूर कहीं उड़ जाता है [ग़ज़ल] - सतपाल ख़याल
कच्चा मकान उसपे बरसात का भी डर है [ग़ज़ल] - सतपाल 'ख़्याल'
तकतीअ और बहर [ग़ज़ल : शिल्प और संरचना] - सतपाल 'ख्याल'
काफ़िया पर विमर्श-2 [ग़ज़ल : शिल्प और संरचना] - सतपाल 'ख्याल',
काफ़िया पर एक विमर्श [ग़ज़ल : शिल्प और संरचना] - सतपाल 'ख्याल',
आज जब होली है तो वो घर से ही निकले नहीं [ग़ज़ल] - सतपाल ख़याल
ग़ज़ल का इतिहास और ग़ज़ल की भाषा [ग़ज़ल शिल्प और संरचना - स्थायी स्तंभ] - सतपाल ख्याल

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