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गहरी प्यास को जैसे मीठा जल देते तुम बाबूजी
जीवन को सारे प्रश्नों के हल देते तुम बाबूजी

सबके हिस्से शीतल छाया, अपने हिस्से धूप कड़ी
गर होते तो काहे ऐसे पल देते तुम बाबूजी

माँ तो जैसे – तैसे रुखे सूखे टूकड़े दे पायी
गर होते तो टाफ़ी, बिस्कुट, फल देते तुम बाबूजी

अपने बच्चों को अच्छा – सा वर्तमान तो देते ही
जीवन भर को एक सुरक्षित कल देते तुम बाबूजी

काश तरक्की देखी होती अपने नन्हें-मुन्नों की
फिर चाहे तो इस दुनिया से चल देते तुम बाबूजी

रचनाकार परिचय:-


दिनेश रघुवंशी का जन्म 26 अगस्त 1964 में खैरपुर (बुलंदशहर) उ.प्र में हुआ। आपने मेरठ विश्वविद्यालय से एम. कॉम तक की शिक्षा प्राप्त की है। 

आपकी प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ हैं - आसमान बाक़ी है (ग़ज़ल संग्रह) दो पल (ग़ज़ल संग्रह) अनकहा इससे अधिक है (गीत संग्रह)। आप अनेक साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित हैं तथा लगभग सभी प्रमुख राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित ही हैं। आपने आकाशवाणी, टाइम्स एफ॰ एम॰, दूरदर्शन, साधना, एन॰ डी॰ टी॰ वी॰, जी॰ टी॰ वी॰, जनमत व अन्य अनेक चैनल्स पर कवि-सम्मेलनों का मंच संचालन एवं काव्य-प्रस्तुति की है।