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संदीप राज़ 'आनंद' की गज़लें
खेल [ग़ज़ल] - गौरव शुक्ला
दुआओं में कुछ था असर [ग़ज़ल]- दिगम्बर नासवा
तेरी याद से जुड़े हुए [ग़ज़ल]- दिगम्बर नासवा
सिवा तेरे जिंदगी में कोई भी  गुहर  न था [ग़ज़ल] - गुमनाम पिथौरागढ़ी
तेरा मिलना अजाब हो जैसे [ग़ज़ल] - गुमनाम पिथौरागढ़ी
हुआ करे  [ग़ज़ल] - वीनस केसरी
दिखा है झूठ में कुछ फ़ाइदा  [ग़ज़ल] - वीनस केसरी
आपको देख कर देखता रह गया: वसीम बरेलवी
कह उसे जो बात दिल में [कविता] - श्यामल सुमन
मौसम [ग़ज़ल]- सतपाल 'ख्याल',
बस इक शज़र गया [ग़ज़ल] - गौरव शुक्ला
जीने का हिसाब लाया है [ग़ज़ल] - गुमनाम पिथौरागढ़ी
राह दिखा देता है [ग़ज़ल]- सतपाल 'ख्याल',
नहीं करते [ग़ज़ल] - प्राण शर्मा
बचा है अब यही इक रास्ता क्या [ग़ज़ल] - वीनस केसरी
मान जाया करो [ग़ज़ल] - वीनस केसरी
“निराला”: विरुद्धों का सामंजस्य [विरासत] – अजय यादव
बुला कर घर में हर इक अजनबी को [ग़ज़ल] - प्राण शर्मा
गमों में अब कमी होने लगी [ग़ज़ल] - गुमनाम पिथौरागढ़ी

आइये कारवां बनायें...

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