यह समाचार चिंतित कर रहा है कि साहित्य शिल्पी "मेजर गौतम राजरिशी" भारत पाक सीमा पर हुई गोलीबारी में घायल हो गये है। साहित्य शिल्पी परिवार गौतम जी के जज्बे को सलाम करता है। एक शायर केवल नर्म दिल ही नहीं रखता वरन गर्म हौसला भी रखता है इसी लिये देश के दुश्मन हमारी शस्य-श्यालमा भूमि पर आँख उठाने का दुस्साहस नहीं करते। साहित्य शिल्पी परिवार आपके स्वास्थ्य को ले कर बेहद चिंतित है और साथ ही हमे गर्व है आप पर। आज प्रस्तुत है मेजर राजरिषी की एक ग़ज़ल उनके ही सम्मान में: -

उनका हर एक बयान हुआ
दंगे का सब सामान हुआ

नक्शे पर जो शह्‍र खड़ा है
देख जमीं पे बियाबान हुआ

झोंपड़ ही तो चंद जले हैं
ऐसा भी क्या तूफ़ान हुआ

कातिल का जब से भेद खुला
हाकिम क्यूं मेहरबान हुआ

कोना-कोना घर का चमके
है जब से वो मेहमान हुआ

आँखों में सनम की देख जरा
कत्ल का मेरे उन्वान हुआ

एक हरी वर्दी जो पहनी
दिल मेरा हिन्दुस्तान हुआ

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मेजर गौतम राजरिशी से फोन पर वार्ता हुई। उन्हे हाँथ में गोली लगी है, गोली निकाल दी गयी है तथा वे अभी अस्पताल में ही स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। साहित्य शिल्पी परिवार इस बात से संतोष का अनुभव करता है कि वे स्वस्थ हो रहे हैं तथा उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिल जायेगी।

साहित्य शिल्पी परिवार अपने शायर पर गर्व का अनुभव करता है

रचनाकार परिचय:-
मेजर गौतम राजरिशी का जन्म १० मार्च, १९७६ को सहरसा (बिहार) में हुआ। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी व भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत वर्तमान में आप कश्मीर में पदस्थापित हैं।

गज़ल व हिन्दी-साहित्य के शौकीन गौतम राजरिशी की कई रचनायें कादम्बिनी, हंस आदि साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं।

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