रचनाकार परिचय:-


श्री अब्दुल रहमान मन्सूर दिल्ली व आसपास में एक जाने-माने गज़लकार हैं। वर्तमान में फरीदाबाद में निवास कर रहे रहमान साहब मूलत: मुरादाबाद से सम्बद्ध हैं।

आप पिछले बीस से भी अधिक वर्षों से संज़ीदा और मज़ाहिया (हास्य) दोनों तरह की गज़लों और गीतों की रचना करते आ रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रीय व राष्ट्रीय स्तर के मुशायरों में शिरकत कर आपने सुनने वालों को अपनी खूबसूरत गज़लों और गीतों के सम्मोहन में बाँधा है।

एक बेहतरीन गज़लकार होने के साथ साथ आप गज़ल के रचना-शास्त्र (उरूज़) के उस्ताद के रूप में भी जाने जाते हैं।

मुँह के दे-दे कर निवाले क्या कहें
किस तरह बच्चे हैं पाले क्या कहें

जिनके ज़हनों पे हैं ताले क्या कहें
क़ौम है उनके हवाले क्या कहें

शेर सुनने का नहीं जिनको शऊर
पढ़ रहे हैं वो मकाले क्या कहें

पाए जो हमने अज़ीज़ों के तुफ़ैल
क्या दिखायें दिल के छाले क्य़ा कहें

की तरक्की इस कदर साइन्स ने
पड़ गये जीने के लाले क्या कहें

हम वफ़ा की राह पे जब भी चले
किस कदर फिक्रे उछाले क्या कहें

गर नहीं तुझको मुहब्बत पे यकीं
और मुझको आजमा ले क्या कहें