साहित्य शिल्पीरचनाकार परिचय:-
मूलतः फरीदाबाद, हरियाणा के निवासी दिगंबर नासवा को स्कूल, कौलेज के ज़माने से लिखने का शौक है जो अब तक बना हुआ है।

आप पेशे से चार्टेड एकाउंटेंट हैं और वर्तमान में दुबई स्थित एक कंपनी में C.F.O. के पद पर विगत ७ वर्षों से कार्यरत हैं।

पिछले कुछ वर्षों से अपने ब्लॉग "स्वप्न मेरे" पर लिखते आ रहे हैं।

ये किसकी चाल है, मोहरे हैं, किसका है पत्ता
हिली कुर्सी, हिले सब लोग, हिल गयी सत्ता

ये किसने रंग दिए, दीवारों दर संसद भवन के
ये किसका पान है, चूना है, किसका है कत्था

ये किसकी चाह थी, मिट जाये या फांसी चढ़े
भगत सिंह, राज, और सुखदेव का बागी जत्था

ये कैसा न्याय है जो मर मिटा इस देश की खातिर
नहीं मिलता है उस परिवार को राशन भत्ता

शहद की प्यास रखते हो तो कुछ हिम्मत करो
चुरा लो फूल से या तोड़ लो मधु का छत्ता