दहशत के वास्ते न ही नफरत के वास्ते
जीवन मिला है सबको मुहब्बत के वास्ते

इज्ज़त के सामने भला दौलत का क्या वकार
मर जाते हैं हजारों ही इज्ज़त के वास्ते

रचनाकार परिचय:-


प्राण शर्मा वरिष्ठ लेखक और प्रसिद्ध शायर हैं और इन दिनों ब्रिटेन में अवस्थित हैं।
आप ग़ज़ल के जाने मानें उस्तादों में गिने जाते हैं। आप के "गज़ल कहता हूँ' और 'सुराही' - दो काव्य संग्रह प्रकाशित हैं, साथ ही साथ अंतर्जाल पर भी आप सक्रिय हैं।


बैठे--बिठाए घर में ही मिलती नहीं कभी
संघर्ष करना पड़ता है शोहरत के वास्ते

हरयाली हर तरफ ही हो दुनिया में दोस्तो
काम ऐसा कोई कीजिये कुदरत के वास्ते

माना कि "प्राण" इसकी जरूरत सही मगर
क्यों भूलें रिश्तों -नातों को दौलत के वास्ते