माना, इसकी निढाल चाल नहीं
ठीक लेकिन जहाँ का हाल नहीं

रचनाकार परिचय:-


प्राण शर्मा वरिष्ठ लेखक और प्रसिद्ध शायर हैं और इन दिनों ब्रिटेन में अवस्थित हैं।
आप ग़ज़ल के जाने मानें उस्तादों में गिने जाते हैं। आप के "गज़ल कहता हूँ' और 'सुराही' - दो काव्य संग्रह प्रकाशित हैं, साथ ही साथ अंतर्जाल पर भी आप सक्रिय हैं।


कौन है दोस्त, है सवाल मेरा
कौन दुश्मन है, ये सवाल नहीं

काश , हमदर्द भी कोई होता
दोस्तों का यहाँ अकाल नहीं

यूँ तो खाते हैं सब नमक यारो
हर कोई पर नमक हलाल नहीं

उससे उम्मीद कोई क्या रक्खे
जिसको अपना कोई ख़याल नहीं

कुछ न कुछ तो कमाल है सब में
माना, हर शख्स पर जमाल नहीं

"प्राण" छलकेगा ये भला क्योंकर
दूध में एक भी उबाल नहीं