
हिन्दी और राजस्थानी भाषा के लब्ध प्रतिष्ठित कवि श्री कन्हैयालाल सेठिया आज मौन हो गए। वे ९० वर्ष के थे। भारत सरकार ने साहित्य के क्षेत्र में उनके अवदानों का मूल्यांकन करते हुए उन्हें पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा था। सेठिया जी के निधन पर देश भर से शोक संवाद प्राप्त हो रहे हैं। पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत, राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने संदेशों में सेठिया जी के साहित्यिक अवदानों के साथ-साथ सामाजिक विषयों पर उनके कार्यों को मील का पत्थर कहा है।
व्यापारिक घराने से होने के बावजूद श्री सेठिया ने कभी भी साहित्य के साथ समझौता नहीं किया। उनका जन्म राजस्थान के सुजानगढ़ में ११ सितम्बर १९१९ को हुआ था। उनके पिता का नाम छगनमल सेठिया और माता का नाम मनोहारी देवी सेठिया था। सेठिया जी की प्रारम्भिक पढ़ाई कलकत्ता में हुई। स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़ने के कारण कुछ समय के लिए आपकी शिक्षा बाधित हुई, लेकिन बाद में आपने राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। दर्शन, राजनीति और साहित्य आपके प्रिय विषय थे।
राजस्थान में सामंतवाद के ख़िलाफ़ आपने जबरदस्त मुहिम चलायी और पिछडे वर्ग को आगे लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारत छोडो आन्दोलन के समय आप कराची में थे। १९४३ में सेठिया जी जयप्रकाश नारायण और राम मनोहर लोहिया के संपर्क में आए। सेठिया जी को ज्ञानपीठ की और से मूर्तिदेवी साहित्य पुरास्कार १९८८ में दिया गया। उसके बाद आपकी विविध कृतियों के लिए साहित्य अकादमी सहित देश की असंख्य संस्थाओं ने सम्मानित किया।
सेठिया जी की अमर कृतियों में ’धरती धोरा री’ राजस्थान का वंदना गीत है, जो करोडो राजस्थानी लोगों के हृदय की आवाज है। महाराणा प्रताप पर उनकी लिखी कविता- पथल आर पीतल काफ़ी लोकप्रिय रही। कुन जमीं रो धनि जैसी सैकड़ों कविताओं के मध्यम से सेठिया जी ने आम आदमी के उत्थान का कार्य किया।
महाकवि के महाप्रयाण पर हार्दिक श्रद्धांजलि .


20 टिप्पणियाँ
महाकवि के महाप्रयाण पर हार्दिक श्रद्धांजलि .
जवाब देंहटाएंMahakavi padmshri kanhaiya lal
जवाब देंहटाएंSethia ke mahaprayaan par shradanjli
कन्हैयालाल सेठिया हिंदी और राजस्थानी के बहुत बड़े कवि थे . बचपन से ही, जबसे पाठ्यक्रम में उनकी कविता 'पाथळ और पीथळ' पढी,तभी से वे मेरे प्रिय कवि बन गए थे.
जवाब देंहटाएंउनका लिखा गीत 'धरती धोरां री' तो जैसे राजस्थानी उपराष्ट्रीयता का राष्ट्रगीत है .
इस महान कवि को मेरी श्रद्धांजलि .
श्रद्धेय सेठिया जी को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।
जवाब देंहटाएंउन रिक्ति पूरी नहीं होगी।
दादा सेठियाजी को भावभीना वंदन.
जवाब देंहटाएंहो सके तो उनकी रचनाओं की बानगी भी पेश कीजियेगा...वही सच्ची श्रध्दांजली होगी ऐसे
अनूठे सरस्वती पुत्र को.
समाचार सचमुच में पीडादायक है ।
जवाब देंहटाएंथोडे में अपनी पूरी बात कहने के धनी सेठियाजी की, दो पंक्तियों की एक कविता बरसों पहले पढी थी -
झूठ सफेद
सत्य रंगहीन
सेठियाजी को श्रध्दांजलि
'पीतल'र पाथल' और 'धरती धोरां री' अमर गीत के रचयिता महाकवि श्री कन्हैयालाल सेठिया जी को ई-हिन्दी साहित्य सभा की तरफ से भाबभीनी श्रद्धांजलि।
जवाब देंहटाएंकन्हैयालल सेठिया को भावभीनी श्रद्धांजलि। कविता और कवि अमर होते हैं।
जवाब देंहटाएंश्री सेठिया जी को विनम्र श्रद्धांजलि!
जवाब देंहटाएंश्रद्धांजलि, कन्हैयालाल जी कभी भुलाये नहीं जा सकेंगे।
जवाब देंहटाएंsethiaji ko sachhi shraddhanjali tabhi hogi, jab Rajasthani bhasha ko samvidhan ki aathwin suchi me shamil kar liya jayega.
जवाब देंहटाएंA great poet and a great soul. SHRADDANJALI.
जवाब देंहटाएंAlok Kataria
भावभीनी श्रद्धांजलि। साहित्य शिल्पी से मेरा अनुरोध है कि उनके जीवन व रचनाओं पर एक विस्तृत लेख प्रस्तुत करें।
जवाब देंहटाएंअच्छा लेख प्रस्तुत किया है प्रकाश चंडालिया जी नें। मेरी कन्हैयालाल जी को भावभरी श्रद्धांजली।
जवाब देंहटाएंश्रद्धेय कन्हैयालाल सेठिया जी को विनम्र श्रद्धांजलि।
जवाब देंहटाएंआदरणीय कन्हैयालाल सेठिया जी को विनम्र श्रद्धांजलि।
जवाब देंहटाएंमहाकवि के महाप्रयाण पर
जवाब देंहटाएंहार्दिक श्रद्धांजलि .....
कन्हैयालल सेठिया जी को श्रद्धा सुमन अर्पित
जवाब देंहटाएंश्रद्धांजलि .
जवाब देंहटाएंकन्हैयालाल सेठिया जी पर मैनें विकिपीडिआ हिन्दी में लेख दिया था. बहुत समय से व्यस्त होने के कारण देख नहीं पाया. आज मैंने देखा कि विकिपीडिया में उनके स्वर्ग वास की तिथि ग़लत थी. उसे सुधारा. उनके निधन से बहुत दुख हुआ. भगवान ऐसी आत्माएं बार बार धरती पर अवतरण लें. लक्ष्मण बुरडक
जवाब देंहटाएंआपका स्नेह और प्रस्तुतियों पर आपकी समालोचनात्मक टिप्पणियाँ हमें बेहतर कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करती हैं.