चार सौ बीसी करी थी
जेब तब मेरी भरी थी

जिस्म तो जिंदा खड़ा था
रूह बस मेरी मरी थी

फ़न ही उसका " फन "था यारो
उसमें ये जादूगरी थी

ख्वाब दे कर उड़ गयी वो
प्यार वाली जो परी थी

दर्द से मैं रो रहा था
लोग समझे मसखरी थी