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लघुता में गुरुता 'सलिल', अलंकार है अल्प. [काव्य का रचना शास्त्र: ६२] -  आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
परिकरान्कुर में रखे, साभिप्राय कवि नाम.[काव्य का रचना शास्त्र: ४७] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"
कहते पर्यायोक्ति में, घुमा-फिराकर बात [काव्य का रचना शास्त्र : ४५] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"
परिकर अलंकार [काव्य का रचना शास्त्र: ४५] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"
समासोक्ति [काव्य का रचना शास्त्र: ४४] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"
विनोक्ति अलंकार [काव्य का रचना शास्त्र: ४३] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"
एक धर्म, बहु क्रिया ही, है सहोक्ति- ले मान. [काव्य का रचना शास्त्र: ४२] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"
काव्य का रचना शास्त्र- ४१: हो अर्थान्तरन्यास में, समर्थ्य-समर्थक भाव - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
एकाधिक में साम्य ही, है निदर्शना मीत [काव्य का रचना शास्त्र: ४०] - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
अलंकार दृष्टान्त को जानें, लें आनंद [काव्य का रचना शास्त्र: ३९] - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
'प्रतिवस्तुपमा' में कहें, एक धर्म दो शब्द [काव्य का रचना शास्त्र : ३८] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"
दीपक वर्ण्य-अवर्ण्य में, कहता धर्म समान [काव्य का रचना शास्त्र : ३७]  दीपक अलंकार - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"
अलंकार परिणाम यदि, कार्य सके संधान..[काव्य का रचना शास्त्र: ३५] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल".
'सलिल' काकु वक्रोक्ति में, ध्वनित अर्थ कुछ अन्य [काव्य का रचना शास्त्र: ३४] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"
एक शब्द के अर्थ दो, करे श्लेष-वक्रोक्ति [काव्य का रचना शास्त्र: ३३] - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
अलंकार स्मरण 'सलिल', इससे उसकी याद [काव्य का रचना शास्त्र: ३२] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल" .
वीप्सा घृणा-विरक्ति है [काव्य का रचना शास्त्र: ३१] - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
वदाभास पुनरुक्त है, अलंकार ज्यों फूल [काव्य का रचना शास्त्र: ३०] - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल"

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