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जिंदगी और अन्य कवितायें [कविता] - विनय भारत शर्मा




जिंदगी और अन्य कवितायें - विनय भारत शर्मा

ज़िन्दगी

उछलती, मचलती,
गडमडाती
साथ चलकर फडफ़ड़ाती,
दुख- सुख
, दर्द सुकून
हिस्सों में बटकर
कहीं भटककर
रास्ते पर
बढ़ती गाड़ी
ज़िन्दगी
गुमनाम है।

**

समस्या

मैं एक दिन चिंता में डूबा हुआ था,
चिंता मुझे खा रही थी
या मैं चिंता को
ये समझ रहा था,
कि अचानक
मेरे दिमाग ने चिंता को
स्वीकृत किया
और
मन में विचार चलने लगे
सोचते सोचते रात हो गई
अब मैं सोने का प्रयास
कर ही रहा था
कभी इधर करवट तो कभी उधर करवट,
लेकिन नींद न आई,
अब में मैंने चिंता पर
और विचार करने लगा
चिंता और बढ़ने लगी,
कुछ घण्टे गुजरने के बाद भी
जब मैं इसका समाधान
न खोज पाया
तो मिझे लगा
कहीं मर न जाऊं
अब सर में दर्द होने लगा,
मैंने बाम लगाया,
पर चिंता थी कि
रम गई
और जो मैं सोच रहा था
अब बढ़ते बढ़ते वह कहीं और भटक गई,
इस उम्मीद में कि
कही न कही कोई और उपाय मिलेगा,
पर ,चिंता भटक गई,
और अनेक चिंताए जो पहले नही थी
अब वे भी बढ़ गई,
धीरे धीरे चिंता का पहाड़ बन गया,
अब रोज़ चिंता बढ़ती गई और
चिंता का पहाड़
बुखार में बदल गया
चिंता तो गई नही
मैं बीमार पड़ गया।

**


जवान


ईमानदारी,साहस,वीरता
कर्तव्य,देशभक्ति
को जब एक ओखली में कूटकर मिलाया जाता है ,
और मिश्रण को
एक आकृति में
ढाला जाता है
तब प्राणपुंज
वह मिट्टी का पुतला,
भारतीय जवान
कहलाता है

**
चापलूसी

ज़िन्दगी के फलसफे पर
कुछ लोग हैं
जो
देते हैं सर्वश्रेष्ठ
लेकिन
सहन नही करते
गुलामी

क्योंकि
उनका स्वाभिमान
होता है
उच्च पर।

जब -जब लोग
झुकाते हैं उनको
कट जाते हैं लेकिन
झुकते नही
क्योंकि
झुकना सीखा नही
उन्होंने गुलामी में
उन चापलूसों के आगे
जहां
चापलूसी करके फैला रहे हैं
अधर्म
और तोड़ रहे हैं
धर्म की राह को।

**

वक्त

गुजर रहा है धीरे धीरे
बूंद बूंद बन वह,
और रुकना मना है
अस्तित्व की तलाश में
खोजता हुए
एक आधारहीन स्तम्भ
क्योंकि
वह रुकता नही
हां
साँसे रुक जाती है
इंतज़ार में
सुकून के पल
ढूंढती हुई
ज़िन्दगी की राह पर
और
बीत जाता है
काल का सूचक संकेत
वक्त।

परिचय
नाम - विनय भारत शर्मा
शिक्षा - M.A ,B.ed.
सम्पर्क - sharmavinaybharat@gmail.com
निवास - गंगापुर सिटी ,राजस्थान।
पुस्तकें
1. बात कुछ तो है
2.और ग़ज़ल हो गई
अनेक पत्रपत्रिकाओं में रचनाएँ व अनेक प्रमाण पत्र प्राप्त हुए ।
साझा संकलनों का सम्पादन किया व रचनाएँ प्रकाशित हुई।
सभी विधाएं लिखता हूँ।
लगभग 8 पुस्तकें प्रकाशित होने के लिए रंगमंच प्रकाशन में कार्य जारी है।

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