मैं वाकिफ हूं
नाबीना तो नहीं हूं
तुम्हारे हांथों को देखा है मैंने

रोज धूप में सिके सिकाए हाँथ
जब सर में फेरते हो तो
पथरीली आँखों को बोझिल कर जाते हो

सुबह-सुबह की वो गरमा-गरम चाय
तुम्हारे बाद भी जीभ जलाती रहेगी

साहित्य शिल्पीरचनाकार परिचय:-


धीरेन्द्र सिंह का जन्म १० जुलाई १९८७ को छतरपुर जिले के चंदला नाम के गाँव में हुआ था| आपने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा चंदला में ही पूरी की। वर्तमान में आप इंदौर में अभियन्त्रिकी में द्वितीय वर्ष के छात्र हैं| कविताएँ लिखने का शौक आपको अल्पायु से ही था, किन्तु पन्नो में लिखना कक्षा नवीं से प्रारंभ किया| आप हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में रचनाएं लिखते हैं। आपका 'काफ़िर' तखल्लुस है|