आज पेश है स्वरशिल्पी द्वारा प्रस्तुत कवि महेंद्र भटनागर का गीत "गीत में तुमने सजाया रूप मेरा..." जिसे आवाज़ दी है, उन्हीं के सुपुत्र आदित्य विक्रम ने।
गीत के बोल हैं:

गीत में तुमने सजाया रूप मेरा
मैं तुम्हें अनुराग से उर में सजाऊँ !
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रंग कोमल भावनाओं का भरा
है लहरती देखकर धानी धरा
नेह दो इतना नहीं, सँभलो ज़रा
गीत में तुमने बसाया है मुझे जब
मैं सदा को ध्यान में तुमको बसाऊँ !
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बेसहारे प्राण को निज बाँह दी
तप्त तन को वारिदों-सी छाँह दी
और जीने की नयी भर चाह दी
गीत में तुमने जतायी प्रीत अपनी
मैं तुम्हें अपना हृदय गा-गा बताऊँ

तो आइये सुनते हैं प्रेमास्पद से पूर्णरूपेण एकाकार होने की भावना से परिपूरित ये गीत:

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